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मुर्शिदाबाद की राजनीति में हुमायूं कबीर का बड़ा दांव

बदली चुनावी रणनीति, अब रेजिनगर और नवदा से खुद संभालेंगे मोर्चा

18 Mar 2026

मुर्शिदाबाद की राजनीति में हुमायूं कबीर का बड़ा दांव

कोलकाता। विधानसभा चुनाव की आहट के बीच मुर्शिदाबाद की राजनीति के धुरंधर और पूर्व तृणमूल विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी चुनावी बिसात पूरी तरह बदल दी है। अपनी बेबाकी के लिए मशहूर कबीर ने बुधवार को सबको चौंकाते हुए एलान किया कि वे अब अपनी पारंपरिक सीट भरतपुर या बेलडांगा से चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि रेजिनगर और नवदा विधानसभा सीटों से खुद मैदान में उतरेंगे। 
तृणमूल से निष्कासित होने के बाद अपनी नई पार्टी 'आम जनता विकास पार्टी' के जरिए तीसरा मोर्चा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हुमायूं कबीर का यह फैसला जिले के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से उलट-पुलट कर सकता है। हुमायूं ने शुरुआत में माकपा और आईएसएफ के साथ गठबंधन बनाने की पुरजोर कोशिश की थी और इसके लिए उन्होंने 15 मार्च तक का समय भी निर्धारित किया था। हालांकि, विपक्षी दलों की ओर से कोई ठोस संकेत न मिलने के बाद उन्होंने स्वतंत्र रूप से आगे बढऩे का निर्णय लिया। कबीर का मानना है कि अकेले चुनाव लडऩा चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन रेजिनगर और नवदा जैसे इलाकों में उनकी व्यक्तिगत पकड़ आज भी बरकरार है।

गौरतलब है कि रेजिनगर वही सीट है जहां से कबीर ने 2011 में पहली बार जीत दर्ज की थी, इसलिए यहां से लडऩा उनकी अपनी सियासी जड़ों की ओर वापसी के रूप में देखा जा रहा है। इस चुनावी घोषणा में एक और दिलचस्प मोड़ तब आया जब हुमायूं ने अपने पूर्व दामाद यासिर हैदर की भूमिका स्पष्ट की। पहले चर्चा थी कि यासिर कोलकाता में फिरहाद हकीम के खिलाफ उतर सकते हैं, लेकिन अब कबीर ने साफ कर दिया है कि यासिर हैदर कंदी सीट से तृणमूल के कद्दावर नेता अपूर्व सरकार के खिलाफ ताल ठोकेंगे। यह मुकाबला न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि अपूर्व सरकार को हराना कबीर के लिए अपनी राजनीतिक साख बचाने जैसा है। हुमायूं की पार्टी ने अब तक दो चरणों में लगभग 15 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जिसमें मालदा जिले की 4 महत्वपूर्ण सीटें भी शामिल हैं। कबीर ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी की अंतिम और पूर्ण सूची 22 मार्च तक जारी कर दी जाएगी। मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल जिले में हुमायूं कबीर की इस सक्रियता और बदली हुई रणनीति ने तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस, दोनों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। अब देखना यह होगा कि दो सीटों से चुनाव लड़कर हुमायूं खुद को कितना साबित कर पाते हैं और उनके द्वारा खड़ा किया गया यह तीसरा विकल्प जनता को कितना लुभा पाता है।

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